रमजान महज़ एक मजहबी रस्म नहीं, बल्कि इंसान की पूरी जिंदगी को संवारने का महीना है: मौलाना नदवी
मोहम्मद आलम
अयोध्या। माह-ए-मुबारक रमजान की आमद के साथ ही इबादत, तौबा और रहमत का दौर शुरू होने जा रहा है। मस्जिदों में तैयारियां मुकम्मल की जा रही हैं और अहल-ए-ईमान इस पाक महीने के इस्तकबाल में मशगूल हैं। इसी मौके पर मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना मुजाहिद उल इस्लाम नदवी ने रोज़े और समाजी जिम्मेदारियों को लेकर तफसीली बयान जारी किया।
मौलाना नदवी ने कहा कि रमजान महज़ एक मजहबी रस्म नहीं, बल्कि इंसान की पूरी जिंदगी को संवारने का महीना है। रोज़ा हमें सब्र, शुक्र और परहेज़गारी की तालीम देता है। यह इंसान को अपने अंदर झांकने, गलतियों से तौबा करने और अपने किरदार को बेहतर बनाने का मौका प्रदान करता है।
उन्होंने कहा, रोज़ा सिर्फ भूख-प्यास बर्दाश्त करने का नाम नहीं, बल्कि यह तक़वा हासिल करने और इंसानियत की खिदमत का पैगाम है। जब एक रोज़ेदार भूख की शिद्दत महसूस करता है तो उसे गरीबों और जरूरतमंदों का एहसास होता है, और यही एहसास उसे मदद और रहमदिली की तरफ ले जाता है।
मौलाना मुजाहिद उल इस्लाम नदवी ने समाजी हालात पर रोशनी डालते हुए कहा कि आज के दौर में जरूरत इस बात की है कि रमजान के महीने को आपसी भाईचारे, अमन और मोहब्बत को मजबूत करने का जरिया बनाया जाए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे झूठ, फरेब, ग़ीबत और बुराइयों से परहेज़ करें और अपने अख़लाक़ को इस्लामी तालीमात के मुताबिक ढालें।
उन्होंने नौजवानों को खास नसीहत करते हुए कहा कि रमजान के महीने में अपना वक्त बेकार कामों में जाया करने के बजाय इबादत, तालीम और समाजी खिदमत में लगाएं। वालिदैन से भी गुजारिश की गई कि वे अपने बच्चों की तरबियत पर खास तवज्जो दें और उन्हें मस्जिदों के एहतराम और तरावीह की पाबंदी की अहमियत समझाएं।
मौलाना नदवी ने वाज़ेह किया कि अगर आज चांद की तस्दीक हो जाती है तो आज रात से तरावीह की नमाज़ अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह, और पहला रोज़ा गुरुवार को रखा जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि चांद की तस्दीक के लिए जिम्मेदार मरकज़ी एलान का इंतजार करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
रूदौली नगर समेत आसपास के इलाकों में रमजान की तैयारियों को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। मस्जिदों में साफ-सफाई, रोशनी और वुज़ूखानों की मरम्मत का काम तेज़ कर दिया गया है। वहीं बाजारों में खजूर, सेवइयां, फल और जरूरी सामान की खरीदारी बढ़ गई है। कारोबारियों को भी रमजान में बेहतर कारोबार की उम्मीद है।
अंत में मौलाना नदवी ने दुआ की कि अल्लाह तआला इस रमजान को पूरे मुल्क और इंसानियत के लिए अमन-ओ-सलामती और बरकत का जरिया बनाए तथा हम सबको इसकी असल रूह को समझने और अपनाने की तौफीक अता फरमाए।
