सर्दी आते ही बहुत से लोगों को लगता है कि कमर पहले से ज़्यादा दुखने लगी है। जो दर्द हल्का रहता था, वही जकड़न बन जाता है। कई बार बिना कोई नई चोट के भी दर्द बढ़ जाता है। यह सिर्फ मौसम नहीं, शरीर के अंदर बदलती स्थिति का असर होता है। यह पोस्ट उन्हीं लोगों के लिए है जिन्हें हर सर्दी में कमर दर्द परेशान करता है और जो सिर्फ painkiller पर निर्भर नहीं रहना चाहते।
सर्दी में दिखने वाले आम लक्षण
* सुबह उठते ही कमर अकड़ी हुई लगना
* सीधे खड़े होने में समय लगना
* ज्यादा देर बैठने पर दर्द बढ़ना
* ठंड लगते ही stiffness बढ़ जाना
* रात में करवट बदलने में परेशानी
* कमर से कूल्हे या पैर की ओर खिंचाव
* गर्म चीज़ों से थोड़ी राहत मिलना
ये संकेत बताते हैं कि दर्द सिर्फ मांसपेशियों का नहीं है।
सर्दी में दर्द क्यों बढ़ता है?
ठंड का मौसम वात दोष को बढ़ाता है।
वात का गुण है सूखापन, ठंडक और जकड़न।
सर्दी में मांसपेशियों और नसें सिकुड़ जाती हैं।
रक्त संचार धीमा हो जाता है।
पाचन कमजोर होने लगता है।
जब अग्नि कमजोर होती है तो आम बनने लगता है।
यही आम और बढ़ा हुआ वात कमर के जोड़ों और नसों में बैठ जाता है। इसीलिए MRI normal होने पर भी दर्द बढ़ सकता है।
घरेलू और जीवनशैली उपाय
* सुबह बहुत ठंड में तुरंत न नहाएं
* कमर को हमेशा ढककर रखें
* एक posture में लंबे समय तक न बैठें
* हल्की धूप लेना लाभकारी है
* ठंडी हवा और ठंडे पानी से बचें
* भोजन गरम और हल्का रखें
* अचानक भारी न करें
* हल्की stretching पर्याप्त है
दवा तभी काम करेगी जब आदतें उसका साथ दें।
औषधियां (मार्गदर्शन के लिए)
* योगराज गुग्गुल: वातजन्य कमर दर्द और जकड़न में सहायक
* महायोगराज गुग्गुल: पुराने और बार-बार लौटने वाले दर्द में उपयोगी
* दशमूल क्वाथ / दशमूल रस: सूजन, और movement pain में
* रास्ना एरंडादि कषाय: कमर से पैर की ओर जाने वाले दर्द में
* महानारायण तेल / नारायण तेल: हल्की गर्माहट के साथ बाहरी मालिश के लिए
* दवाइयां स्थिति, उम्र और पाचन देखकर ही लें।
गर्भावस्था या गंभीर रोग में वैद्य से सलाह ज़रूरी है।
आज का एक सहायक उपाय
सर्दी में कमर दर्द के लिए सरल सहायक उपाय रात को सोने से पहले कमर पर हल्की गुग्गुलु मालिश करें और उसके बाद कमर को ढककर रखें। यह वात की ठंडक को संतुलित करता है और सूजन की जकड़न को कम करने में मदद करता है।
याद रखने वाली बात
* सर्दी में बढ़ा कमर दर्द बीमारी नहीं, वात असंतुलन की चेतावनी है।
* दर्द दबाने से ज़्यादा ज़रूरी है वात और पाचन को संतुलित करना।
* यही सोच दर्द को स्थायी रूप से कम करती है।
Health is wealth
मीना अग्रवाल
आगरा
