ढाका (बांग्लादेश): बांग्लादेश के कपड़ा क्षेत्र के मजदूरों ने न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की मांग को लेकर सोमवार को भी प्रदर्शन किया. विरोध प्रदर्शन के तीसरे दिन भी कपड़े बनाने वाली कई फैक्ट्रियां बंद रहीं. सुरक्षा बलों ने आरोप लगाया है कि प्रतिबंधित अवामी लीग के समर्थक, जिनमें बेदखल की गईं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भी शामिल हैं, इस अशांति को भड़का रहे हैं. सरकार ने दावा किया है कि ये प्रदर्शन देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों का हिस्सा हैं.
सी बीच, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने रविवार को वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक बैठक की. जिसमें, उन्होंने कहा कि दिसंबर से पहले देश को अस्थिर करने के प्रयास किए जा रहे हैं और उन्होंने कपड़ा क्षेत्र में चल रही मौजूदा अशांति को इन घटनाक्रमों से जोड़ा. रहमान ने इस स्थिति को शेख हसीना से भी जोड़ा, जो वर्तमान में भारत में हैं और जिन्होंने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की घोषणा की है.
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि इस आंदोलन को सीमा पार से भड़काया जा रहा है. स्थिति को संभालने के प्रयासों के बीच उन्होंने सोमवार सुबह सचिवालय में कपड़ा फैक्ट्री मालिकों के साथ एक बैठक की.
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि हटाई गई सरकार का सपोर्ट करने वाले ग्रुप हाईवे ब्लॉकेड, आगजनी और हिंसा के ज़रिए अस्थिरता पैदा करने के लिए मज़दूरों का शोषण कर रहे थे और दावा किया कि लेबर ऑर्गनाइज़ेशन के बैनर तले काम करने वाले कुछ लोग इन एक्टिविटीज़ में शामिल थे.
सलाहुद्दीन ने कहा कि सरकार ने हिंसक घटनाओं से जुड़े वीडियो फुटेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग और दूसरे सबूत इकट्ठा किए हैं, और कहा कि कुछ लोगों को पहले ही सज़ा मिल चुकी है. डेली स्टार के मुताबिक, उन्होंने कहा, “हम यह साफ करना चाहते हैं कि जो लोग मजदूरों के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं, कानून-व्यवस्था तोड़ रहे हैं और अस्थिरता पैदा करने की साज़िश कर रहे हैं, उनसे सख्ती से निपटा जाएगा.”
इन विरोध प्रदर्शनों के केंद्र में बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग में मजदूरी में बढ़ोतरी की मांग है. वर्तमान में कपड़ा श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी 12,500 टका है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग कर रहे हैं. कपड़ा श्रमिकों की इन मांगों को बांग्लादेश सरकार द्वारा हाल ही में सरकारी कर्मचारियों के लिए घोषित नए वेतनमान से और बल मिला है, जिसने उनके वेतन और लाभों को लगभग दोगुना कर दिया है.
गारमेंट वर्कर्स अब अपनी मजदूरी में भी इसी के अनुरूप बढ़ोतरी करने के लिए दबाव बना रहे हैं. हालांकि, फैक्ट्री मालिकों ने इस मांग को पूरा करने में असमर्थता जताई है. उन्होंने इसके पीछे ऑर्डर्स में कमी, स्थिर कीमतें और कच्चे माल के आयात की ऊंची लागत का हवाला दिया है. उनका कहना है कि इन कारणों से मजदूरी में इतनी बड़ी बढ़ोतरी करना मुश्किल है.
इस बढ़ते विवाद को देखते हुए, सरकार ने कपड़ा श्रमिकों के लिए संशोधित मजदूरी तय करने के लिए एक ‘वेतन बोर्ड’ का गठन किया है. हालांकि, बोर्ड बनने के बावजूद श्रमिकों ने अपना प्रदर्शन जारी रखा है, जिससे इस पूरे सेक्टर में तनाव बना हुआ है. लगातार जारी इस अशांति ने बांग्लादेश के रेडी-मेड गारमेंट्स उद्योग के महत्व की ओर सबका ध्यान खींचा है, जिसकी शुरुआत 1970 के दशक के अंत और 1980 के दशक की शुरुआत में हुई थी.
बांग्लादेश अब दुनिया के सबसे बड़े कपड़ा निर्यातकों में से एक है, और देश की कुल निर्यात कमाई में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से भी अधिक है. इस उद्योग में सीधे तौर पर लगभग 40 लाख श्रमिक कार्यरत हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या लगभग 60 से 70 प्रतिशत है. एक तरफ श्रमिक लगातार उच्च मजदूरी की मांग कर रहे हैं, दूसरी तरफ फैक्ट्री मालिक व्यापारिक दिक्कतों का हवाला दे रहे हैं और सरकार वेतन बोर्ड के जरिए मध्यस्थता कराने की कोशिश कर रही है.
