अदानी समूह के साथ विवादों को निपटाने के लिए ब्रिटिश फर्म की मदद ले रहा बांग्लादेश, बिजली दरों को लेकर चल रहा विवाद

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ढाका: बांग्लादेश ने अडानी पावर लिमिटेड के साथ कोयले की कीमत और बिजली दरों को लेकर चल रहे विवाद में अपनी कानूनी तैयारी को मजबूत करते हुए एक ब्रिटिश विधि फर्म को नियुक्त किया है. यह फर्म बांग्लादेश के सरकारी बिजली विकास बोर्ड (बीपीडीबी) का प्रतिनिधित्व करेगी और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रक्रिया में देश का पक्ष रखेगी.

बीपीडीबी के अधिकारियों के अनुसार, लंदन स्थित प्रतिष्ठित विधि फर्म थ्रीवीपी चैम्बर्स (ThreeVP Chambers) को सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) में बांग्लादेश की ओर से कानूनी पैरवी के लिए चुना गया है. अडानी पावर द्वारा शुरू की गई मध्यस्थता प्रक्रिया के बाद यह फैसला लिया गया.

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में बढ़ी कानूनी लड़ाई

अडानी पावर लिमिटेड ने पिछले वर्ष सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर में मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की थी. भारतीय कंपनी का दावा है कि बांग्लादेश पर कोयले की आपूर्ति से जुड़ा लगभग 48.5 करोड़ डॉलर (करीब 4,000 करोड़ रुपये) बकाया है. समझौते के प्रावधानों के अनुसार, औपचारिक मध्यस्थता से पहले मीडिएशन की प्रक्रिया अनिवार्य है, हालांकि यह बाध्यकारी नहीं होती.

बीपीडीबी का कहना है कि अडानी पावर द्वारा कोयले की कीमतें अत्यधिक रखी जा रही हैं, जिससे बांग्लादेश में बिजली उत्पादन की लागत बढ़ रही है और सरकारी वित्त पर दबाव पड़ रहा है.

राष्ट्रीय समीक्षा समिति की भूमिका

बांग्लादेश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, थ्रीवीपी चैम्बर्स पिछले कई महीनों से अडानी पावर से जुड़े बिजली समझौते पर गठित एक राष्ट्रीय समीक्षा समिति को सलाह दे रही थी. यह समिति पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान किए गए बिजली क्षेत्र के समझौतों की समीक्षा कर रही थी.

समिति ने हाल ही में अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी है, जिसमें बिजली खरीद समझौतों से जुड़े वित्तीय और कानूनी पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया है.

सरकार बदलने के बाद तेज हुई बातचीत

पांच अगस्त 2024 को शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बीपीडीबी ने अडानी पावर के साथ फिर से बातचीत शुरू करने की कोशिशें तेज कर दी हैं. नई सरकार बिजली आयात समझौतों की शर्तों की दोबारा समीक्षा कर रही है, ताकि देश की ऊर्जा लागत को नियंत्रित किया जा सके. अडानी पावर के साथ चल रहा यह विवाद बांग्लादेश की ऊर्जा नीति और अंतरराष्ट्रीय निवेश समझौतों के लिए अहम माना जा रहा है.

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