लखनऊ: वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण समाज को साधने की दिशा में बड़ा राजनीतिक संदेश दिया. जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर हुए कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ब्राह्मण समाज को पार्टी में स्थान और सम्मान देने का भरोसा दिलाया. उन्होंने कहा कि पवन पांडे, सनातन पांडे और माता प्रसाद पांडे जैसे नेताओं के साथ-साथ ब्राह्मण समाज के सभी लोगों को समाजवादी पार्टी उचित सम्मान और भागीदारी देगी. इससे पहले बुधवार सुबह अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क पहुंचकर जनेश्वर मिश्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की.
सरकार पर अनुमति न देने का लगाया आरोप: इस दौरान बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे. इसके बाद पार्टी कार्यालय में आयोजित भव्य कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज से जुड़े कई समाजवादी नेताओं ने अपने विचार रखे. अंत में अखिलेश यादव ने ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी सभी वर्गों को सम्मान देने में विश्वास रखती है. अखिलेश यादव ने कहा कि “छोटे लोहिया” के नाम से प्रसिद्ध जनेश्वर मिश्र ने अपना पूरा जीवन समाजवादी आंदोलन को समर्पित किया.
ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश: उन्होंने सादगी, ईमानदारी और बिना किसी भेदभाव के समाज को जोड़ने का काम किया. ऐसे महान समाजवादी नेता को याद करने के लिए सभी लोग यहां एकत्र हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जनेश्वर मिश्र जयंती का कार्यक्रम पार्क में आयोजित करने की अनुमति सरकार ने नहीं दी, जिसके कारण पार्टी को कार्यक्रम कार्यालय में करना पड़ा. उन्होंने कहा कि सरकार चाहे अनुमति दे या न दे, समाजवादी विचारधारा और मिशन लगातार आगे बढ़ता रहेगा.
गाड़ी नहीं पलटी थी, सरकार पलटने से बची थी: उन्होंने सनातन पांडे की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश के जिले-जिले में जाकर जनेश्वर मिश्र जयंती के कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए जनसंपर्क किया, जिसके परिणामस्वरूप हजारों लोग कार्यक्रम में पहुंचे. अखिलेश यादव ने कहा कि जब जनेश्वर मिश्र पार्क का निर्माण हुआ था, तब यह देश का सबसे बड़ा पार्क बनकर सामने आया. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने प्रदेश में विकास के साथ-साथ विरासत को भी संजोने का काम किया है. ब्राह्मण समाज का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग पीडीए की नई-नई परिभाषाएं गढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें यह याद रखना चाहिए कि “प” का अर्थ “पंडित” भी होता है.
दानपात्र में ताला ऊपर है, लेकिन नीचे बनी है सुरंग: उन्होंने कहा, “पंडित का शॉर्ट फॉर्म ‘प’ और डी है. जितना पीडीए को बदनाम करने की कोशिश होगी, उतना ही यह और मजबूत होगा.” कानपुर के चर्चित विकास दुबे एनकाउंटर का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि उस समय उन्होंने कहा था कि “गाड़ी नहीं पलटी थी, सरकार पलटने से बची थी.” उन्होंने दावा किया कि भविष्य में तकनीक और सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए सच्चाई सामने आएगी कि उस समय वास्तव में क्या हुआ था. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में ब्राह्मण समाज के लोगों को निशाना बनाया गया और उनके साथ अन्याय हुआ.
सड़कों के विकास मॉडल पर उठाए सवाल: उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी कभी भी किसी जाति या वर्ग के साथ भेदभाव नहीं करती. भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारधारा सभी को साथ लेकर चलने की रही है. मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे कुछ लोगों की स्थिति ऐसी है कि उनकी बात उनके अपने लोग भी नहीं सुनते. उन्होंने कुशीनगर की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने गए लोगों को पहले साबुन से नहलाने की बात सामने आई थी.
विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवालिया निशान: उन्होंने कहा कि जनेश्वर मिश्र पार्क आज भी प्रदेश के सबसे सुंदर पार्कों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में पेड़ लगाए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने भी पार्क बनाए, लेकिन उनमें हरियाली और पर्यावरण की उपेक्षा की गई. उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर भी भाजपा ने कोई नया काम नहीं किया, बल्कि समाजवादी पार्टी द्वारा बनाए गए कार्यों का ही नाम बदल दिया. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज विधानसभा के बड़े संवैधानिक पद पर नेता विरोधी दल माता प्रसाद पांडे हैं और उनका व्यवहार तथा कार्यशैली सभी जानते हैं.
विधानसभा चुनाव में जनता देगी जवाब: अयोध्या के राम मंदिर के दान को लेकर भी अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि दानपात्र पर ऊपर से ताला लगा है लेकिन नीचे से “सुरंग” बनाई गई है. उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के नाम पर आए दान में गड़बड़ी हुई है और जब मामला सामने आया तो एक छोटे कर्मचारी को जेल भेजकर पूरी जिम्मेदारी उसी पर डाल दी गई. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी चोरी बिना बड़े लोगों की जानकारी के संभव नहीं है.
बीजेपी के विकास मॉडल पर सवालिया निशान: उन्होंने भाजपा नेताओं द्वारा चंदे की रसीद मांगने पर भी निशाना साधते हुए कहा कि धार्मिक दान-दक्षिणा की कभी रसीद नहीं होती. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में बैठे कुछ लोगों का नाम पहले भी नकली रसीद प्रकरण में सामने आया था और जनता ने उन्हें चुनाव में जवाब दिया. उन्होंने कहा कि अब यदि राम मंदिर के दान में गड़बड़ी हुई है तो उसका जवाब भी जनता और भगवान श्रीराम दोनों देंगे. अपने संबोधन के अंत में अखिलेश यादव ने कानपुर की 63 किलोमीटर लंबी सड़क का जिक्र करते हुए कहा कि चार हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत से बनी इस सड़क पर बार-बार गड्ढे हो रहे हैं और लगातार मरम्मत करनी पड़ रही है. उन्होंने इसे भाजपा सरकार के विकास मॉडल पर सवाल बताते हुए कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं.
