नई दिल्ली : होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन भारतीयों की मौत को लेकर अमेरिका और भारत के बीच तनाव बढ़ रहा है. भारत ने 48 घंटे के भीतर अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को दूसरी बार तलब किया है. अधिकारियों ने ओमान के तट के पास भारतीय चालक दल के सदस्यों वाले तीन वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी नौसेना के हमलों को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया.
यह पहली बार था, जब भारत ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय चालक दल वाले जहाजों को निशाना बनाया था. भारत ने कहा था कि ये हमले तुरंत रुकने चाहिए. पलाउ के ध्वज वाले तेल टैंकर ‘मैरीवेक्स’ को आठ जून को अमेरिकी सुरक्षा बलों द्वारा निशाना बनाया गया. इसमें 24 भारतीय नाविक सवार थे. चालक दल के सभी सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया. अमेरिका ने 10 जून को पलाउ ध्वज वाले एक अन्य टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर हमला किया था, जिसमें जहाज पर सवार 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मौत हो गई थी. गुरुवार को 20 भारतीय को ले जा रहे गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले जहाज ‘जलवीर’ पर अमेरिकी नौसेना द्वारा हमला किया गया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि ‘सेटेबेलो’, ‘मैरीवेक्स’ और ‘जलवीर’ पर हमले ‘‘अमेरिकी नौसेना की ओर से किए गए थे.’’ यूएस सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि एमटी जलवीर ने “ओमान की खाड़ी के रास्ते ईरान से तेल ले जाने की कोशिश की.” कमांड ने कहा, “US सेना के निर्देशों को बार-बार न मानने पर यूएस के एक विमान ने जहाज के इंजन रूम पर दो हेलफायर मिसाइलें दागीं.”
जायसवाल ने बताया कि तीन में से दो जहाज अमेरिकी ट्रेजरी के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के दायरे में थे, जबकि तीसरे जहाज को नियमों का पालन न करने वाला माना गया था. ओएफएसी अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की वित्तीय खुफिया और प्रवर्तन एजेंसी है, और यह ईरानी तथा रूसी तेल की बिक्री पर अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई करती है.
कमांड ने बताया कि ओमान की खाड़ी में टैंकर को “बेकार” कर दिया गया, क्योंकि “जहाज ने ईरानी तेल ले जाने की कोशिश करके ईरान पर लगी नाकेबंदी का उल्लंघन किया था. इस हफ्ते अमेरिकी सेना द्वारा बेकार किया गया यह तीसरा कमर्शियल जहाज था.”
सेंटकॉम ने कहा, “इस हफ्ते की शुरुआत में, सोमवार और मंगलवार को अमेरिकी विमानों ने पलाऊ के झंडे वाले जहाजो एमटी मैरिवेक्स और एमटी सेटेबेलो को रोक दिया. मैरिवेक्स ने ईरानी बंदरगाह तक जाने की कोशिश करके नाकेबंदी का उल्लंघन किया और सेटेबेलो ने ईरानी तेल ले जाने की कोशिश की.”
पिछले महीने एक अमेरिकी विमान ने एमटी जलवीर पर गोलीबारी की थी. 15 मई को, ओमान के तट से लगभग 30 नॉटिकल मील दूर इसे चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाई गईं और गल्फ ऑफ ओमान की ओर वापस मुड़ने का निर्देश दिया गया.व्यावसायिक जहाजों पर हमले, अमेरिका और ईरान द्वारा फिर से शुरू किए गए सैन्य हमले और समुद्री सुरक्षा का मुद्दा – ये सभी पूर्वी फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में अगले हफ्ते होने वाली G-7 नेताओं की बैठक के लिए राजनयिक और आर्थिक चुनौतियां पेश करते हैं.
इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के कई नेता शामिल होंगे.मोदी फ्रांस (13-14 जून: नीस, 16-18 जून: एवियन और पेरिस) और स्लोवाकिया (14-16 जून) की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं.
रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्मा चेल्लानी ने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पलाऊ के झंडे वाले टैंकर पर अमेरिकी हवाई हमले में भारतीय क्रू के तीन सदस्यों की मौत हुई, लेकिन इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत कम ध्यान दिया गया. मोदी ने इस हमले पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है और विदेश मंत्रालय पर एक सामान्य राजनयिक विरोध दर्ज कराने की जिम्मेदारी छोड़ दी है.यह कोई अकेली घटना नहीं थी. इस हफ़्ते अमेरिकी सेना ने भारतीय क्रू सदस्यों वाले तीसरे टैंकर पर हमला किया है. सोमवार को, अमेरिकी नौसेना के F/A-18 सुपर हॉर्नेट ने ओमान की खाड़ी में एक और टैंकर पर सटीक निशाना साधने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे ओमान के अधिकारियों को उस पर सवार सभी 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा.”
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने ट्वीट किया – “भारतीय कमर्शियल जहाजों पर अमेरिका के क्रूर हमलों में कम से कम तीन भारतीय नागरिकों की मौत हुई है. ये हमले अमेरिका की हथियारबंद लूट और सरकारी समुद्री डकैती की जारी नीति का साफ सबूत हैं. हम मारे गए भारतीय नाविकों के परिवारों और दोस्तों के प्रति सहानुभूति जताते हैं और भारत के लोगों व सरकार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका को उसके गैर-कानूनी व्यवहार के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए, क्योंकि यह व्यवहार वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है और साथ ही समुद्री आवाजाही की आजादी को भी खतरे में डालता है.”
