– दूध और गैस के बढ़ते दामों के बावजूद गाजियाबाद के सौरभ राठौड़ मिनरल वाटर से बना रहे खास चाय
गाजियाबाद। सुबह की शुरुआत चाय की चुस्की के बिना अधूरी सी लगती है। चाय केवल एक पेय नहीं बल्कि लोगों की दिनचर्या, रिश्तों और मुलाकातों का अहम हिस्सा बन चुकी है। कांच के गिलास और मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी जाने वाली चाय आज भी लोगों को अलग ही सुकून देती है। चाय की टपरियों पर सुबह से लेकर देर शाम तक चर्चाओं का दौर चलता रहता है।
गाजियाबाद के नेहरू स्टेडियम के सामने स्थित ,सुबह की चाय हमारे यहां, नाम की टपरी आज लोगों के बीच खास पहचान बना चुकी है। इस टपरी को चलाने वाले सौरभ राठौड़ अपनी चाय मिनरल वाटर से तैयार करते हैं, जिससे स्वाद और गुणवत्ता दोनों अलग नजर आते हैं। यहां कांच के गिलास और मिट्टी के कुल्हड़ में चाय परोसी जाती है, जिसका स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है। चाय के साथ ब्रेड, बन, बिस्कुट, रस, पोहा, मठरी और पेटीज भी लोगों को खूब भा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के अवसर पर सौरभ राठौड़ ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई, दूध के बढ़ते दाम और गैस सिलेंडर की कीमतों ने छोटे कारोबारियों की मुश्किलें जरूर बढ़ाई हैं, लेकिन वह अपने ग्राहकों के स्वाद और गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि कोशिश यही रहती है कि जो भी ग्राहक यहां चाय पीने आए, वह स्वाद को हमेशा याद रखे।
इसी क्रम में यशोदा हॉस्पिटलl में कार्यरत आशीष अग्रवाल ने बताया कि वह रोज सुबह नेहरू स्टेडियम में अपने मित्रों के साथ बैडमिंटन खेलते हैं और उसके बाद सभी मित्र सौरभ की टपरी पर बैठकर कुल्हड़ वाली चाय का आनंद लेते हैं। उन्होंने कहा कि खेल के बाद कुल्हड़ में मिलने वाली गर्म चाय पूरे दिन की ताजगी का एहसास कराती है।
इस अवसर पर मौजूद गुलमोहर एनक्लेव सोसायटी के निवासी गौरव बंसल और दिनेश सिंह ने कहा कि वह रोज नेहरू स्टेडियम में वॉकिंग करने आते हैं और योग भी करते हैं , घर की चाय अपनी जगह है, लेकिन सौरभ की चाय का स्वाद लोगों के दिलों में बस गया है। यही वजह है कि लोग सुबह और शाम यहां की चाय की चुस्की लेने अपने दोस्तों और परिचितों के साथ जरूर पहुंचते हैं।
