दमिश्क: सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बसर अल असद को मंगलवार को दमिश्क की एक कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है. जानकारी के मुताबिक कोर्ट ने उन्हें सोच-समझकर की गई हत्या का दोषी पाए जाने पर यह सजा सुनाई. इसके साथ ही दक्षिणी सीरिया के डेरा प्रांत में राजनीतिक सुरक्षा विभाग के पूर्व प्रमुख आतिफ नजीब को भी हत्या और टॉर्चर का दोषी पाए जाने के बाद मौत की सजा सुनाई गई.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दमिश्क की अदालत का यह फैसला सीरिया के अंतरिम अधिकारियों द्वारा असद को सुनाई गई मौत की पहली सजा है. इन अधिकारियों ने इस साल असद की पिछली सरकार से जुड़े लोगों के ख़िलाफ कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें उन्हें व्यक्तिगत रूप से या उनकी अनुपस्थिति में दोषी ठहराया गया. कोर्ट के फैसले के अनुसार, असद को 13 साल लंबे गृहयुद्ध से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया गया. इस मामले को ‘युद्ध अपराध’ और “मानवता के खिलाफ अपराध’ से जुड़ा भी बताया गया.
दिसंबर 2024 में, जब हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के नेतृत्व वाली विपक्षी सेनाएं दमिश्क की ओर बढ़ीं, तो असद अपने परिवार के साथ सीरिया से भाग गए. इसके बाद उन्हें रूस में शरण दी गई. हयात तहरीर अल-शाम के नेतृत्व वाली विपक्षी ताकतों ने उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब से हमला शुरू किया और 8 दिसंबर, 2024 की सुबह दमिश्क पहुंच गईं, जिसके बाद असद को सत्ता से हटा दिया गया और असद परिवार के पांच दशक से ज्यादा समय से चले आ रहे शासन का अंत हो गया.
अहमद अल-शरा, जिनकी सेनाओं ने असद को सत्ता से हटाने वाले हमले का नेतृत्व किया था, बाद में सीरिया की अंतरिम सरकार के प्रमुख बने. इसके बाद उन्होंने असद के दौर में हुए खून-खराबे और अत्याचारों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने का संकल्प लिया. अल-शरा लगभग 60 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले पहले सीरियाई नेता भी बने, जहां उन्होंने सीरिया पर लगाए गए प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटाने की मांग की.
इसके बाद में ट्रंप प्रशासन ने ‘हयात तहरीर अल-शाम’ (HTS) – जिसे ‘अल-नुसरा फ्रंट’ के नाम से भी जाना जाता है, को ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ का दर्जा देने का फैसला वापस ले लिया. इसी संगठन ने अल-शारा की अगुवाई में उस आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसके कारण असद को सत्ता से हटना पड़ा था. सीरिया से जाने के बाद, असद ने एक बयान में अपनी पहली सार्वजनिक टिप्पणी की; यह बयान उनके नाम से जारी किया गया और सीरियाई राष्ट्रपति कार्यालय के टेलीग्राम चैनल पर प्रकाशित किया गया था.
असद ने इस बात से इनकार किया कि उनके जाने की योजना पहले से बनाई गई थी और उन दावों को भी खारिज कर दिया कि दमिश्क में लड़ाई के आखिरी दौर के दौरान वे सीरिया छोड़कर चले गए थे. उनके जारी किए गए बयान में कहा गया, कि सबसे पहले, सीरिया से मेरा निकलना न तो पहले से तय था और न ही यह लड़ाई के आखिरी घंटों में हुआ, जैसा कि कुछ लोगों ने दावा किया है. इसके उलट, मैं दमिश्क में ही रहा और रविवार, 8 दिसंबर 2024 की सुबह तक अपनी जिम्मेदारियां निभाता रहा.
उनके बयान के अनुसार, विपक्षी ताकतों के दमिश्क में घुसने के बाद असद तटीय शहर लताकिया में स्थित रूसी सैन्य अड्डे पर चले गए; उन्होंने कहा कि वे सैन्य अभियानों की निगरानी करना चाहते थे. उन्होंने दावा किया कि जब सैन्य स्थिति बनाए रखना मुश्किल हो गया, तो मॉस्को ने बेस कमांड से उन्हें रूस भेजने की व्यवस्था करने को कहा. बयान में कहा गया है कि बेस से निकलने का कोई व्यावहारिक जरिया न होने के कारण, मॉस्को ने बेस के कमांड से अनुरोध किया कि रविवार, 8 दिसंबर की शाम को रूस के लिए तुरंत निकासी की व्यवस्था की जाए.
