नोएडा। फर्जी खबरों से मोटी रकम वसूलने जैसे कई गंभीर आपराधिक मुकदमें और गैंगवार की आशंका के चलते 2024 से जिला कारागार बांदा में बंद स्क्रैप माफिया रवि काना को रिहा करने में बड़ी चूक सामने आई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गौतमबुद्धनगर ने रवि काना के खिलाफ सेक्टर-63 थाने में दर्ज एक प्रकरण में बी वारंट जारी होने के बावजूद जेल से रिहा करने पर जेल अधीक्षक से छह फरवरी तक लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।
इन धाराओं में दर्ज है मुकदमा
सीजेएम ने पूछा, आरोपित को हिरासत से भगाने के मामले में क्यों न आपके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए? बता दें कि यह प्रकरण 14 जनवरी 2026 में सेक्टर-63 थाने में दर्ज एक मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें आरोपित रविंद्र काना के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 308 (5), 351 (2), 3 (5) जुड़ी हैं। बता दें कि स्क्रैप माफिया रवि काना के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं। उसे अन्य सभी मामलों में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
अदालत के सामने पेश किया जाए
अदालत के आदेश के अनुसार आरोपित रविंद्र काना पूर्व से ही अन्य गंभीर मुकदमों में जिला कारागार बांदा में बंद था। इसी बीच गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट की सेक्टर- 63 पुलिस ने प्रकरण में रिमांड स्वीकृत कराने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इस प्रकरण में अदालत से आरोपित के खिलाफ बी वारंट जिला कारागार बांदा को भेजा गया था। बी-वारंट का मतलब होता है कि आरोपित को हर हाल में अदालत के सामने पेश किया जाए।
वीडियो कान्फ्रेंसिंग से पेशी कराई गई
29 जनवरी 2026 को आरोपित को बी-वारंट पर अदालत में पेश करना था लेकिन, जेल अधीक्षक की मांग के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस गार्द नहीं मिली थी। इसके चलते आरोपित की वीडियो कान्फ्रेंसिंग से पेशी कराई गई थी।
उसी दिन शाम 6:39 बजे आरोपित रवि काना को बांदा जेल से रिहा कर दिया, जबकि आरोपित के खिलाफ नोएडा के केस में न्यायालयीय कार्रवाई चल रही थी।
कोर्ट ने आदेश में साफ कहा कि जेल प्रशासन को जानकारी थी कि आरोपित नोएडा के केस में बी-वारंट पर तलब है। बावजूद इसके उसे किन परिस्थितियां एवं किस आधार पर रिहा किया गया।
क्यों न आपके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए?
सीजेएम ने बांदा जेल अधीक्षक से तीन बिंदुओं पर स्पष्ट लिखित जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा कि आरोपित के बी-वारंट पर तलब होने की जानकारी के बावजूद उसे जेल से क्यों छोड़ा गया? न्यायालय से कोई सूचना या आदेश मिले बिना आरोपित को किन परिस्थितियों में रिहा किया गया?
क्यों न इस कृत्य के लिए आप पर आरोपित के हिरासत से भागने देने जैसा मुकदमा चलाया जाए? कोर्ट इस गंभीर प्रकरण में काफी सख्त है। प्रथमदृष्टया, सीजेएम ने इसे जेल प्रशासन की बड़ी चूक लापरवाही माना है।
