रंग और रूहानियत के संग, रूदौली में अमन की तैयारी तेज

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पीस कमेटी की बैठक में प्रशासन ने कसे सुरक्षा के पेंच

अयोध्या। फिजाओं में इन दिनों एक अनोखा संगम महसूस किया जा सकता है। एक ओर मस्जिदों से गूंजती तरावीह की नमाज, इफ्तार की रौनक और दुआओं की पाकीजगी माहौल को रूहानी बना रही है, तो दूसरी ओर गलियों और चौपालों में होली के गीत, गुलाल और होलिका दहन की तैयारियां रंगों की आहट को और गहरा कर रही हैं। जब आस्था और उल्लास के दो बड़े पर्व एक साथ दस्तक देते हैं, तो सिर्फ खुशियां ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियां भी कई गुना बढ़ जाती हैं। इसी संवेदनशीलता को समझते हुए प्रशासन ने शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में रूदौली कोतवाली परिसर में पीस कमेटी की विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उप जिलाधिकारी संतोष कुमार एवं क्षेत्राधिकारी आशीष नगम ने संयुक्त रूप से की। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी (ईओ), बिजली विभाग के एसडीओ, प्रभारी निरीक्षक संजय मौर्य सहित अन्य विभागीय अधिकारी और विभिन्न समुदायों के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। बैठक में होलिका दहन स्थलों की सूची और सुरक्षा व्यवस्था, होली के दिन निकलने वाले जुलूसों के निर्धारित मार्ग, डीजे एवं सार्वजनिक कार्यक्रमों की समय-सीमा, एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की अफवाह, भड़काऊ संदेश या सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी और कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नगर पालिका को निर्देश दिए गए कि होलिका दहन स्थलों और प्रमुख मार्गों पर विशेष सफाई अभियान चलाया जाए, पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा स्ट्रीट लाइट दुरुस्त रखी जाए। वहीं बिजली विभाग को त्योहारों के दौरान निर्बाध विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी रखने को कहा गया।
प्रभारी निरीक्षक रूदौली ने कहा कि संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा और लगातार गश्त की व्यवस्था रहेगी। उन्होंने आमजन से अपील की कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या विवाद की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना दें और आपसी भाईचारे की परंपरा को बनाए रखें।
बैठक के अंत में उपस्थित सभी समुदायों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि रूदौली की पहचान आपसी सद्भाव और साझी विरासत से है, और इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दोनों पर्व शांतिपूर्ण, सम्मानजनक और उत्साहपूर्ण वातावरण में मनाए जाएंगे।

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