आरटीई प्रथम चरण समाप्त लेकिन चयन प्रक्रिया में अव्यवस्था का बोलबाला सवालों के घेरे में सत्यापन प्रक्रिया जीपीए ने उठाए सवाल। गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन ने मुख्य विकास अधिकारी को सौंपा सुझाव पत्र।
शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में होने वाले दाखिलों में पारदर्शिता लाने और ‘कागजी सीटों’ के खेल को खत्म करने के लिए गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन (जीपीए) ने हुंकार भरी और जीपीए आरटीई प्रभारी धर्मेंद्र कुमार यादव ने आज जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी, गाजियाबाद को एक विस्तृत सुझाव पत्र सौंपकर प्रथम चरण के बाद रिक्त बची सीटों के डेटा को तत्काल सार्वजनिक करने की मांग की है।
“कागजों पर फुल, पर अंदर सीटें खाली” – जीपीए का बड़ा खुलासा
संगठन का आरोप है कि अक्सर स्कूल प्रशासन पोर्टल पर सीटें भरी हुई दिखाता है, लेकिन वास्तविकता कुछ और होती है अक्सर बहुत से बच्चे दस्तावेजों की कमी या अन्य कारणों से दाखिला नहीं ले पाते। इन खाली सीटों को बाद में गुपचुप तरीके से ‘मैनेज’ कर लिया जाता है, जिससे पात्र और गरीब बच्चे शिक्षा के हक से वंचित रह जाते हैं। जिस पर संगठन के पदाधिकारियो ने कुछ प्रमुख मांगें रखी।
1.डेटा सार्वजनिक हो: प्रथम चरण के दाखिलों के बाद प्रत्येक स्कूल की ‘एक्चुअल’ रिक्त सीटों की सूची विभाग के पोर्टल और स्कूल के नोटिस बोर्ड पर चस्पा की जाए।
2.वेटिंग लिस्ट के आवेदकों को प्राथमिकता प्रावधान: जो बच्चे चयन से रह गए हैं, उनके लिए स्पष्ट ‘प्रतीक्षा सूची’ जारी हो, ताकि सीट खाली होते ही उन्हें प्राथमिकता मिले।
3.एप्लीकेशन स्टेटस स्पष्ट: हर अभिभावक को पता होना चाहिए कि उसके बच्चे का आवेदन किस स्तर पर और क्यों रुका है।
4.द्वितीय चरण की पारदर्शिता: दूसरे चरण की लॉटरी केवल उन्हीं सीटों पर हो जो वास्तव में खाली हैं, न कि काल्पनिक आंकड़ों पर।
5.जीपीए की मांग: शत-प्रतिशत दाखिला होना अनिवार्य है।
शिक्षा समाज की रीढ़ है। यदि एक भी सीट खाली रह जाती है, तो इसका अर्थ होगा एक बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से वंचित रह गया। हम सभी का कर्तव्य है कि हम इन सीटों को भरने में शिक्षा विभाग कि मदद करें और स्कूलों को पारदर्शिता बरतने के लिए मजबूर करें।
6.’शिक्षा का अधिकार’ केवल कागजों पर नहीं, धरातल पर होना चाहिए।
यदि कोई विद्यालय इन सीटों को ‘शून्य’ दिखाकर छिपाने की कोशिश करता है, तो यह सीधे तौर पर गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा जिसके लिए स्कूल पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
7.गलत सत्यापन की जांच: कई मामलों में अपात्रों के दस्तावेज सत्यापित होने की शिकायतें मिल रही हैं। एसोसिएशन ने मांग की है कि सत्यापन प्रक्रिया का रैंडम ऑडिट हो और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
जीपीए सचिव अनिल सिंह ने कहा कि
“शिक्षा का अधिकार कोई खैरात नहीं, बल्कि हर गरीब बच्चे का संवैधानिक हक है। हमें सूचना मिली है कि कुछ विद्यालय पोर्टल पर गलत जानकारी देकर सीटें छिपा रहे हैं। हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यदि किसी भी स्कूल ने आरटीई रिक्त सीटों का डेटा शिक्षा विभाग को समय रहते सांझा नहीं किया,सार्वजनिक नहीं किया या पात्र बच्चों को प्रवेश देने से मना किया, ऐसे स्कूलों के विरुद्ध कठोर व अनुशासनात्मक, दंडात्मक कार्रवाई करवाने के लिए शासन प्रशासन को मजबूर किया जाएगा। विद्यालय की मान्यता रद्द करने की सिफारिश भी की जा सकती है। पारदर्शिता ही हमारा मुख्य लक्ष्य है।”
इसी कड़ी में जीपीए प्रवक्ता नरेश कुमार कीर व उपाध्यक्ष साधना सिंह ने स्पष्ट किया कि
“समाज के अंतिम छोर पर बैठे प्रत्येक बच्चे को सुलभ शिक्षा दिलाना जीपीए का संकल्प है। नरेश कीर ने अभिभावकों को आह्वान करते हुए कहा—’अभिभावक डरे नहीं, जागरूक बनें। यदि विद्यालय सीट होने के बावजूद दाखिला नहीं दे रहा है, तो तुरंत साक्ष्यों के साथ जीपीए/शिक्षा विभाग से सम्पर्क करें, जीपीए कार्यालय आएं। हमारा यह प्रयास होगा कि सत्र शुरू होने से पहले पहले एक-एक आरक्षित सीट पर दाखिला सुनिश्चित हो। एक भी सीट रिक्त न रहे। इस अवसर पर अनिल सिंह, गौरव चौधरी,मनीष चौधरी, धर्मेन्द्र यादव,नवीन तंवर, साधना सिंह,नरेश कीर, राजू सैफी, कौशलेंद्र सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
निजी स्कूलों पर आरटीई सीटें छिपाने का आरोप, सख्त कार्रवाई की चेतावनी
Leave a Comment
