पढ़ाई के साथ साथ व्यक्तित्व का निर्माण भी जरूरी है
भारत के पूर्व राष्ट्रपति माननीय डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम जी से मिली प्रेरणा और उनके कार्यालय से प्राप्त एक पत्र ने प्रो. डॉ. दिनेश गुप्ता “माइंडसेट गुरु” के जीवन की दिशा को और दृढ़ बना दिया। उस प्रेरणादायी क्षण ने उनके मन में यह विश्वास और मजबूत किया कि शिक्षा केवल ज्ञान देने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम है। उसी संकल्प के साथ उन्होंने विद्यार्थियों की सोच बदलने का अभियान प्रारंभ किया, ताकि हर बच्चा अपने भीतर छिपी असाधारण क्षमता को पहचान सके।
आज दिनेश गुप्ता आनंदश्री अपने अनोखे और प्रभावशाली शिक्षण अंदाज़ के कारण देशभर में प्रसिद्ध हो रहे हैं। वे पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए दैनिक जीवन के विज्ञान, सरल प्रयोगों, मनोवैज्ञानिक संवाद और प्रेरक उदाहरणों का अद्भुत समन्वय करते हैं। उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ-साथ व्यक्तित्व निर्माण भी अत्यंत आवश्यक है। उनके नव्वे मिनट के सत्र विद्यार्थियों के लिए मानसिक परिवर्तन का माध्यम बन जाते हैं, जहाँ वे पाँच शक्तिशाली सूत्र और “आर एस आर सूत्र” के माध्यम से आत्मविश्वास, एकाग्रता और अनुशासन का विकास करना सिखाते हैं।
अब तक लगभग साढ़े पाँच लाख से अधिक विद्यार्थी उनके प्रेरक व्याख्यानों का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। देश के अनेक शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में उन्हें नियमित रूप से आमंत्रित किया जाता है। उनकी उपलब्धियाँ भी उल्लेखनीय हैं—छह बार उनका नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है तथा लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी उन्हें स्थान प्राप्त हुआ है। डेढ़ सौ से अधिक सम्मानों से अलंकृत यह व्यक्तित्व आज शिक्षा जगत में नवाचार और प्रेरणा का प्रतीक बन चुका है।
प्रो. डॉ. दिनेश गुप्ता केवल विषयों का अध्यापन नहीं करते, वे आत्मविश्वास और सकारात्मक चिंतन का संस्कार देते हैं। उनका लक्ष्य है कि विद्यार्थी पढ़ाई को बोझ नहीं, अवसर के रूप में स्वीकार करें और अपने जीवन की दिशा स्वयं निर्धारित करें। उनका संपूर्ण प्रयास नई पीढ़ी को केवल सफल ही नहीं, बल्कि सशक्त, सजग और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। उनकी प्रेरक यात्रा यही संदेश देती है— “सोच बदलेगी, तो भविष्य बदलेगा।”
