सैफई कांड: पीड़िता व आरोपी का डीएनए परीक्षण, आरोपी जेल भेजा गया; अखिलेश यादव ने उठाए सवाल

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सैफई (इटावा): उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के मानसिक रोग विभाग में भर्ती असहाय महिला से दुष्कर्म प्रकरण में जांच और कार्रवाई तेज हो गई है। पीड़िता व आरोपी दोनों का डीएनए परीक्षण कराया गया है और आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। इस बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिना पुलिस सत्यापन संविदा पर कर्मचारियों की तैनाती को लेकर सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया बयान में कहा कि बिना किसी जांच-पड़ताल और पुलिस सत्यापन के संविदा पर नियुक्तियां इस प्रकार की घटनाओं को जन्म देती हैं। उन्होंने जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की बात कही।
जानकारी के अनुसार मानसिक रोग विभाग में 14 जून 2025 को करीब 38 वर्षीय अज्ञात महिला को भर्ती कराया गया था। महिला बोलने, सुनने और समझने में अक्षम है और लंबे समय से उपचाराधीन थी। 17 मार्च 2026 को जांच के दौरान उसके करीब पांच माह की गर्भवती होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद मामला उजागर हुआ।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सफाई कार्य देख रही फर्म सन फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के तहत आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारी ने वार्ड के भीतर ही महिला के साथ कई बार दुष्कर्म किया। वार्ड में अन्य मरीजों की मौजूदगी के बावजूद घटना का लंबे समय तक सामने न आना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
मामले में मानसिक रोग विभागाध्यक्ष की ओर से थाना सैफई में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर पुलिस ने नामजद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ अरुण कुमार मिश्रा समेत 14 नर्सिंग व सहयोगी स्टाफ को हटाते हुए विभाग की जिम्मेदारी संकायाध्यक्ष (मेडिकल) प्रोफेसर डॉ आदेश कुमार को सौंपी है।
गुरुवार देर रात तक जिला अस्पताल में पीड़िता का डीएनए परीक्षण कराया गया, जबकि शुक्रवार को अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाएं पूरी की गईं। आरोपी का भी डीएनए नमूना लेकर उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
मामले की जांच के लिए गठित समिति की अध्यक्षता संकायाध्यक्ष (मेडिकल) कर रहे हैं। समिति द्वारा विभिन्न बिंदुओं पर जांच की जा रही है, जिसमें वार्ड की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की तैनाती और निगरानी प्रणाली शामिल है।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में सफाई कार्य से जुड़े बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में इस प्रकरण ने संविदा व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र की खामियों को फिर उजागर कर दिया है।

👉 मेरे पति को बंद कमरे में टॉर्चर करके जुर्म कबूल कराया गया : पूनम

मूक बधिर महिला से रेप के आरोपी की पत्नी का आरोप जबरिया जुर्म स्वीकार करने को उसके पति सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ ने उसकी पिटाई की है। पूनम का आरोप है कि सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टर ए० के० मिश्रा और मेडिकल स्टाफ ने उनके पति की पिटाई करने के बाद दबाव बनाकर के रेप का झूठा आरोप स्वीकार कराया है । पूनम का कहना है कि उसके पति ने कोई भी जुर्म नहीं किया है उनके पति को झूठा फंसा करके परिवार को बर्बाद कर दिया गया है। पूनम का कहना है कि पति 5 साल से बीमार भी है और डॉक्टरों ने पति से मिलने भी नही दिया और पति को बंद कमरे में यातनायें दी और जबरन जुल्म कबूल कराया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि घटना की निष्पक्ष जांच की जाए

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