गंभीर हालत में रेफर होने जा रहा था मरीज, एक वाक्य ने रोक लिया कदम डॉ. फातिमा हसन रिजवी ने पेश की सेवा और संवेदना की मिसाल
मोहम्मद आलम
अयोध्या। अस्पतालों में अक्सर मशीनों की आवाज और भागदौड़ के बीच एक चीज खोती हुई नजर आती है इंसानियत। लेकिन रुदौली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जो हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि डॉक्टर सिर्फ इलाज ही नहीं करते, वे उम्मीद भी जिंदा रखते हैं।
पटरंगा थाना क्षेत्र के शाहपुर निवासी ‘पुराने’ नामक मरीज जब अस्पताल पहुंचा, तो उसकी हालत बेहद नाजुक थी। वह दीर्घकालिक अवरोधक फेफड़ों की बीमारी (सीओपीडी) से जूझ रहा था सांसें टूट रही थीं, ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा था और हर पल जिंदगी फिसलती नजर आ रही थी। चिकित्सकीय स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल जिला अस्पताल रेफर करने की तैयारी हो चुकी थी।
लेकिन तभी, स्ट्रेचर पर लेटे उस मरीज ने धीमी और टूटी आवाज में कहा मुझे यहीं ठीक कर दीजिए… मैं कहीं और नहीं जाना चाहता…
यह शब्द महज एक गुहार नहीं थे, बल्कि एक भरोसा थे डॉक्टर पर, उस अस्पताल पर, और शायद जिंदगी पर भी।
मरीज की यह पुकार सुनते ही माहौल कुछ पल के लिए ठहर गया। वहां मौजूद हर आंख नम थी, हर दिल द्रवित। और इसी पल ने एक डॉक्टर को सिर्फ चिकित्सक नहीं, बल्कि इंसानियत का प्रतीक बना दिया।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रुदौली की चिकित्सक डॉ. फातिमा हसन रिजवी ने बिना एक क्षण गंवाए अपना निर्णय बदला। उन्होंने खुद मरीज की हालत का गहराई से आकलन किया और तुरंत उपचार शुरू कर दिया। ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया, लगातार निगरानी शुरू हुई और हर संभव चिकित्सकीय प्रयास किए जाने लगे।
डॉ. रिजवी ने सादगी से कहा हमारे लिए हर मरीज की जान सबसे पहले है। उसे बचाना ही हमारा धर्म और कर्तव्य है।
आज मरीज अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में है। उसकी सांसें अब मशीनों के सहारे ही सही, लेकिन स्थिर हैं। डॉक्टरों की टीम हर पल उसकी स्थिति पर नजर रखे हुए है।
इस पूरे घटनाक्रम ने वहां मौजूद लोगों के दिलों को छू लिया। लोग डॉक्टर के इस मानवीय फैसले की खुलकर सराहना कर रहे हैं और मरीज के जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।
यह घटना सिर्फ एक इलाज की कहानी नहीं है, यह उस विश्वास की कहानी है जो एक मरीज अपने डॉक्टर में रखता है… और उस जिम्मेदारी की भी, जिसे एक डॉक्टर हर हाल में निभाता है।
रुदौली की इस छोटी सी घटना ने एक बड़ा संदेश दे दिया जब इंसानियत जिंदा हो, तो उम्मीद कभी नहीं मरती।
