सिडनी: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत के उज्ज्वल भविष्य की जमकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि भारत अपनी भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक क्षमताओं और बढ़ते टेक्नोलॉजी बेस के दम पर अगले 20 से 30 सालों में ‘स्पेस पावरहाउस’ बन सकता है.
इंडो-मेडिटेरेनियन डायलॉग्स के तहत ऑनलाइन बातचीत करते हुए, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह मौका टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और इन्वेस्टमेंट जैसे क्षेत्रों में फैला हुआ है. मॉरिसन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अगले 20 से 30 सालों में भारत स्पेस के क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बन जाएगा, क्योंकि इसकी स्पेस इकोनॉमी और विकसित होगी.’
उन्होंने कहा, ‘भारत अपनी डेमोक्रेसी और संस्थाओं को गंभीरता से लेता है और उसे ऐसा करना भी चाहिए, क्योंकि यह इस बात का एक बड़ा हिस्सा है कि लोग भारत में अपना पैसा क्यों लगाएंगे.’ ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री का मानना है कि जैसे-जैसे इंटरनेशनल कंपनियाँ चीन में अपने निवेश पर फिर से विचार कर रही हैं, भारत निश्चित रूप से उस निवेश को पाने के लिए मुकाबला करेगा.
‘हमने देखा है कि चीन से पैसा निकाला जा रहा है. यह पैसा कहाँ जाएगा? भारत उन देशों में से एक होगा जो इसके लिए अपनी बात रखेंगे, और मुझे लगता है कि वह अच्छी तरह से अपनी बात रख सकता है.’
इस साल जुलाई में नई दिल्ली के स्पेस प्रोजेक्ट्स को बड़ा बढ़ावा देते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कोकोस (कीलिंग) आइलैंड्स पर एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का ऐलान किया. इसका मकसद भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन में सक्रिय रूप से मदद करना है.
यह ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया गया. पीएम मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण के दौरान अपने ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष से मिले थे. मेलबर्न में मीडिया के सामने तस्वीरें खिंचवाते समय दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया, जो दोनों लोकतंत्रों के बीच गहरे होते रणनीतिक तालमेल को दिखाता है.
मीडिया से बात करते हुए पीएम अल्बनीज ने कैनबरा और नई दिल्ली के बीच बढ़ते तकनीकी सहयोग पर जोर दिया. पीएम अल्बनीज ने कहा, ‘जैसे-जैसे हम अंतरिक्ष और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं, हमने कोकोस (कीलिंग) आइलैंड्स पर एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल शुरू करने पर सहमति जताई है. यह टर्मिनल भारत के ऐतिहासिक गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में मदद करेगा.’
