नोएडा/यूपी न्यूज़ एक्सप्रेस: आज के भागदौड़ भरे जीवन में जहाँ तनाव और मानसिक व्याधियाँ आम हो गई हैं, वहीं रूमा गायत्री तोमर एक ऐसी मार्गदर्शक और लाइफ कोच बनकर उभरी हैं, जिन्होंने हज़ारों लोगों के जीवन में शांति और संतुलन का संचार किया है। अपनी संस्था ‘ध्यान शाला’ के माध्यम से वे निरंतर समाज के हर वर्ग को मानसिक अवसाद से उबारकर अध्यात्म की ओर प्रेरित कर रही हैं।
तकनीक से आध्यात्म तक का सफर
रूमा जी की शैक्षिक पृष्ठभूमि अत्यंत प्रभावशाली है। बी.टेक (जेनेटिक इंजीनियरिंग) और MBA करने के बाद, उन्होंने न्यूरोप्लास्टिसिटी और मनोविज्ञान का गहन अध्ययन किया। वे केवल एक आध्यात्मिक गुरु नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाली लाइफ कोच हैं। उनका यह सफर तब शुरू हुआ जब उन्होंने स्वयं जीवन के उतार-चढ़ाव और स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना किया। उन अनुभवों ने उन्हें जीवन की नश्वरता और आंतरिक शांति की शक्ति का एहसास कराया।
’ध्यान शाला’ के माध्यम से परिवर्तन
अपनी संस्था के जरिए रूमा जी निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं:
योग और प्राणायाम: शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ श्वास की शक्ति से मन पर नियंत्रण।
साइकोलॉजिकल काउंसलिंग: आधुनिक मनोविज्ञान और प्राचीन पद्धतियों का मेल।
मेडिटेशन (ध्यान): हज़ारों लोगों को अवसाद, चिंता और पुराने रोगों से मुक्ति दिलाने में सहायक।
संतुलित जीवन:
गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों और भौतिक सुखों के बीच आध्यात्मिक संतुलन बनाने की कला।
महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण
एक कलाकार, माँ, पत्नी और आध्यात्मिक गुरु की भूमिकाओं को बखूबी निभा रहीं रूमा गायत्री तोमर आज की आधुनिक महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। वे मानती हैं कि “प्रकृति हमें विभिन्न रूपों में हमारे सामने लाती है, बस उसे पहचानने और स्वीकार करने की आवश्यकता है।”
सन्देश:
“हर व्यक्ति के भीतर एक अतुलनीय ऊर्जा का भंडार छिपा है। जीवन की चुनौतियों से डरने के बजाय, अपनी जड़ों और आंतरिक यात्रा से जुड़ें। सादगी और ध्यान ही सुखी जीवन की असली कुंजी है।”
