दुवासु: पंचदश दीक्षांत समारोह राज्यपाल, उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में संपन्न

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पशु चिकित्सकों की भूमिका पशु एवं जन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण: आनंदीबेन पटेल

वी पी एस खुराना

मथुरा जनपद के उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान (दुवासू), मथुरा का पंचदश दीक्षांत समारोह दिनांक 10 मार्च 2026 को माननीय राज्यपाल, उत्तर प्रदेश एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री श्री धर्मपाल सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि भारत सरकार के आयुक्त डॉ. नवीन बी. महेश्वरप्पा मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए।
दीक्षांत समारोह का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के गायन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभिजित मित्र ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान गतिविधियों और विस्तार कार्यक्रमों की जानकारी दी।
मुख्य अतिथि डॉ. नवीन बी. महेश्वरप्पा ने अपने संबोधन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को स्मरण करते हुए उनके समाज के प्रति योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने पशुपालन क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों तथा ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ बनाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन तथा बालिनी मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन जैसी महिलाओं द्वारा संचालित दुग्ध उत्पादक संस्थाओं की सफलता की कहानियों का उल्लेख करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने ग्रामीण विकास में मत्स्य पालन जैसे सहायक क्षेत्रों के महत्व पर भी प्रकाश डाला तथा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना जैसी सरकारी पहलों का उल्लेख किया।
विशिष्ट अतिथि श्री धर्मपाल सिंह ने अपने संबोधन में भारत के पशुपालन क्षेत्र की बढ़ती भूमिका तथा विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने नंद बाबा दुग्ध मिशन तथा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इन पहलों का उद्देश्य डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ करना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है।
दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 177 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें 69 पशु चिकित्सा स्नातक, 29 जैव प्रौद्योगिकी स्नातक, 74 स्नातकोत्तर विद्यार्थी तथा 5 पीएचडी शोधार्थी शामिल थे।
अपने दीक्षांत संबोधन में माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्हें अपने जीवन और करियर में समर्पण, धैर्य और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी डिग्री को प्राप्त करना केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सेवा, जिम्मेदारी और आजीवन सीखने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की विशेष सराहना करते हुए कहा कि इस वर्ष लगभग 44 प्रतिशत पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थी छात्राएँ हैं, जो शिक्षा के क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने छात्राओं की शैक्षणिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
माननीय राज्यपाल ने पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और प्रौद्योगिकी के समावेशन की आवश्यकता पर बल दिया तथा “वन हेल्थ” दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पशु चिकित्सकों की भूमिका पशु एवं जन स्वास्थ्य दोनों की सुरक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने खाद्य गुणवत्ता एवं पोषण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में छात्र कल्याण तथा आवासीय सुविधाओं को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय को छात्र सहभागिता के साथ सहकारी मेस प्रणाली विकसित करने की संभावना पर विचार करने की सलाह दी, जिससे विद्यार्थियों को पौष्टिक एवं किफायती भोजन उपलब्ध हो सके। साथ ही उन्होंने छात्रावासों की आधारभूत संरचना एवं सामुदायिक सुविधाओं की समग्र समीक्षा एवं उन्नयन का सुझाव दिया, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर एवं अनुकूल आवासीय वातावरण प्राप्त हो सके।
माननीय राज्यपाल ने यह भी अवगत कराया कि पशु चिकित्सा विद्यार्थियों के इंटर्नशिप भत्ते में वृद्धि के संबंध में वे व्यक्तिगत रूप से प्रयासरत हैं, क्योंकि युवा पशु चिकित्सक पशुपालन क्षेत्र एवं ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे कार्यों की भी सराहना की तथा कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
विद्यार्थियों की उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए माननीय कुलाधिपति द्वारा 14 स्वर्ण पदक, 4 रजत पदक तथा 2 कांस्य पदक प्रदान किए गए।
पशु चिकित्सा स्नातकों में गौरव सिंह को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक, हिमानी चौहान को रजत पदक तथा कमलेश कुमार गढ़वाल को कांस्य पदक प्रदान किया गया। जैव प्रौद्योगिकी स्नातकों में देव शर्मा को स्वर्ण पदक, अन्नू को रजत पदक तथा कृतिका जादौन को कांस्य पदक प्रदान किया गया। इसी प्रकार स्नातकोत्तर वर्ग में शिप्रा तिवारी को विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक तथा एस. साहिथि को रजत पदक प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए विभिन्न स्मृति स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए। गौरव सिंह को आईएसवीपीटी पदक, कर्नल वाई.एन. उपाध्याय स्मृति स्वर्ण पदक, डॉ. महीपाल सिंह स्मृति स्वर्ण पदक, डॉ. पी. राय स्मृति स्वर्ण पदक, डॉ. पी.जी. पाण्डेय स्मृति स्वर्ण पदक, पं. जानकीनाथ मदान स्मृति स्वर्ण पदक तथा दुवासु-आईपीएसए यूजी स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। डॉ. जितेन्द्र कुमार स्मृति स्वर्ण पदक कु. मानसी को प्रदान किया गया।
इसी प्रकार दुवासु-आईपीएसए एम.वी.एससी. स्वर्ण पदक युवराज सिंह तथा रजत पदक जितेन्द्र कुमार शर्मा को प्रदान किए गए। कुलपति स्वर्ण पदक बी.वी.एससी. एवं ए.एच. के लिए श्रेयांशी शर्मा तथा एम.वी.एससी. के लिए शिप्रा तिवारी को प्रदान किया गया।
समारोह में एम.वी.एससी. के चार तथा पीएचडी का एक श्रेष्ठ शोध प्रबंध पुरस्कार भी प्रदान किया गया। बेसिक वेटेरिनरी साइंस में एम.वी.एससी. का श्रेष्ठ शोध प्रबंध पुरस्कार डॉ. प्रिया पचौरी को, वेटेरिनरी पैरा-क्लिनिकल विषयों में डॉ. सोनम कुमारी को, एनिमल प्रोडक्शन साइंस में डॉ. अरुंधति शर्मा को तथा वेटेरिनरी क्लिनिकल विषयों में डॉ. अनूप कुमार को प्रदान किया गया। इसी प्रकार वेटेरिनरी क्लिनिकल विषय में पीएचडी का श्रेष्ठ शोध प्रबंध पुरस्कार डॉ. अनुराधा नीमा को प्रदान किया गया।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार डॉ. अमिताव भट्टाचार्य (सह आचार्य) को उनके उत्कृष्ट शिक्षण एवं शैक्षणिक योगदान के लिए प्रदान किया गया।
शैक्षणिक उपलब्धियों के अतिरिक्त विश्वविद्यालय सामुदायिक विकास और ग्रामीण उत्थान के लिए भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इसी क्रम में 25 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रारंभिक बाल शिक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से त्रिचक्र वाहन, झूला घोड़ा, अंक-अक्षर किट, फल एवं पशु ब्लॉक्स, पज़ल, गेंद, क्ले-रिंग, पंचतंत्र की कहानी पुस्तकें, शैक्षणिक मानचित्र, व्हाइट बोर्ड, मार्कर-डस्टर, किडनी आकार की मेजें तथा कुर्सियाँ वितरित की गईं।
विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र के माध्यम से गोद लिए गए पाँच गांवों के विद्यालयों के विद्यार्थियों के बीच चित्रकला, देशभक्ति गीत एवं भाषण प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं के 12 विजेता विद्यार्थियों को माननीय राज्यपाल द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। साथ ही उन्हें कहानी की पुस्तकें, ड्राइंग बुक, पेंसिल बॉक्स, पेंसिल, रबर, शार्पनर सहित क्रेयॉन रंग तथा रिफ्रेशमेंट बॉक्स भी वितरित किए गए।
यह दीक्षांत समारोह स्नातक हो रहे विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का अवसर रहा तथा विश्वविद्यालय की पशु चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।

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