मेनोपॉज के बाद अपने आप को कैसे फिट रखें?

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मीना अग्रवाल
नेचुरोपैथी

मेनोपॉज के बाद अपने आप को कैसे फिट रखें?

मेनोपॉज, औसतन 47 की उम्र के दौरान महिलाओं का शरीर बड़े बदलावों से गुजरता है। हालांकि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, अमेरिका की रिसर्च के अनुसार भारत में लगभग 50% महिलाएं इसके प्रभाव से अनजान हैं. ऐसे में जानते हैं कि इस दौरान जीवनशैली में कौन-से बदलाव और आदतें आपको सुरक्षित और स्वस्थ रख सकती हैं।

 

1. हाई प्रोटीन और फाइबर युक्त डाइट

मेनोपॉज में हाई-प्रोटीन मांसपेशियों की कमजोरी रोककर मेटाबॉलिज्म बनाए रखता है। कैल्शियम, विटामिन-D और फाइटोएस्ट्रोजेन (सोया, अलसी) हड्डियों को मजबूत कर ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा 30% तक घटाते हैं। ओमेगा-3 हॉट फ्लैशेस व तनाव कम करता है. साबुत अनाज, दाल, फल-सब्जियां लें, रिफाइंड शुगर और कैफीन सीमित रखें‌।

२. रेगुलर टेस्ट

हड्डियों के लिए DEXA स्कैन, हार्ट के लिए लिपिड प्रोफाइल और कैंसर स्क्रीनिंग के लिए मैमोग्राफी व पैप स्मीयर टेस्ट प्रतिवर्ष या डॉक्टर की सलाह पर करवाएं।

३. ये एक्सरसाइज मददगार हो सकती हैं

* एरोबिक: पैदल चलना या तैराकी जैसी अन्य एक्सरसाइज हार्ट रेट बढ़ाकर वजन नियंत्रित करती है और ‘हॉट फ्लैशेस’ (अचानक गर्मी, पसीना और स्किन में रेडनेस) कम होते है।

* स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: मसल मास को बनाए रखती है, जिससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है।

* वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज: हड्डियों पर दबाव डालकर घनत्व बढ़ाती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा टल जाता है।

* योग/प्राणायाम: यह पैरासिम्पथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर कोर्टिसोल घटाता है, जिससे नींद की गुणवत्ता सुधरती है और ‘मूड स्विंग्स’ नियंत्रित होते हैं।

लाइफस्टाइल बीमारियों का खतरा

मेनोपॉज में एस्ट्रोजन हार्मोन घटने से मेटाबॉलिक सिंड्रोम, टाइप-2 डायबिटीज, और हृदय रोगों का खतरा 2 से 3 गुना बढ़ जाता है। पेट का फैट और खराब कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है. बचाव के लिए संतुलित आहार, नमक-शुगर सीमित रखें और संतुलित जीवनशैली अपनाएं।

मेनोपॉज के तीन चरण और उनके लक्षण

* प्रीमेनोपॉज (30-40 साल):

पीरियड्स नियमित और प्रेगनेंसी की क्षमता सामान्य रहती है. इस अवस्था में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर अधिकतर स्थिर रहता है, इसलिए सही लक्षण आम तौर पर नहीं दिखते।

* पेरिमेनोपॉज (40-50 साल):

पीरियड्स अनियमित और एस्ट्रोजन में उतार-चढ़ाव आता है. हॉट फ्लैश, हेयरफॉल, रात में पसीना, वजन बढ़ना, नींद व कमजोर होना तथा मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

* पोस्टमेनोपॉज (50 के बाद):

यह वो अवस्था है जब मासिक धर्म पूरे एक वर्ष बाद 12 महीने या उससे अधिक समय के रुकता है।इस चरण में हड्डियां कमजोर होने और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

Health is wealth

मीना अग्रवाल
आगरा

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