लखनऊ: योगी कैबिनेट ने बेसिक-माध्यमिक सहित संस्कृत शिक्षा के अशासकीय-वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेश चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है. मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई कैबिनेट बैठक में कुल 22 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई.
कैबिनेट की बैठक के बाद निर्णय की जानकारी संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने दी. बताया कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों/वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों/अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों/महाविद्यालयों एवं वित्तविहीन संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों व उनके आश्रितों को सरकारी-निजी चिकित्सालयों में अन्तः रोगी विभाग (आईपीडी) में कैशलेस सुविधा की अनुमन्यता प्रदान की गई. बताया कि इस पर 3000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से कुल 48062 कर्मचारियों पर 14. 4186 करोड़ का व्यय भार आएगा.
बेसिक शिक्षा के 1,22,304 कर्मचारी होंगे लाभान्वित
बताया कि बेसिक शिक्षा के अंतर्गत बेसिक शिक्षा परिषद, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल एवं वित्त विहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कार्मिकों, समग्र शिक्षा परियोजना के अन्तर्गत कार्यरत शिक्षणेत्तर कार्मिकों एवं उनके आश्रित परिवार को कैशलेश चिकित्सा सुविधा प्रदान की गई है. इसके अंतर्गत कुल 122304 कर्मचारियों और 3000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से कुल 3669.12 लाख का वित्तीय व्यय भार अनुमानित है.
उक्त कैशलेस उपचार सुविधा योजना का क्रियान्वयन स्टेट एजेंसी फाई कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटेग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से कराया जाना प्रस्तावित है. यह सुविधा राजकीय चिकित्सालयों तथा साचीज के साथ सम्बद्ध निजी चिकित्सालयों में अनुमन्य होगी, जिसकी दरें वही होंगी, जो प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण द्वारा समय-समय पर होती है.
यात्रियों सहित स्टाफ का होगा बीमा
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रदेश की समृद्ध नदियों गंगा-यमुना-सरयू में सुरक्षित विधि समाप्त जल परिवहन प्रणाली स्थापित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलीय नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई है. इस नियमावली के तहत सुरक्षा मानकों में पंजीकरण एवं सुरक्षा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है. जिससे दुर्घटनाओं पर रोक लगने के साथ ही नदी पर्यटन, पर्यावरण, अनुकूल माल परिवहन और स्थानीय लॉजिस्टिक को व्यापक बढ़ावा दिया जा सके. बताया कि इसके अंतर्गत यांत्रिक व गैर यांत्रिक जलयानों का रजिस्ट्रेशन होगा. इसके लिए 50 रुपये लिए जाएंगे. जिसमे यात्री व जलयान की स्टाफ का सुरक्षा के लिहाज से बीमा होगा. बताया कि वर्तमान में जितने भी जलयान हैं, उनको नए मानक के अनुरूप परिवर्तित करने के लिए 90 दिन का समय निर्धारित किया गया है.
